कोर्ट ने कहा, फलों को पकाने के लिए रसायन का प्रयोग किसी को जहर देने के समान
फलों को पकाने के लिए कीटनाशकों व रसायनों का प्रयोग उपभोक्ताओं को जहर देने के समान है। ऐसे लोगों पर कानूनी कार्रवाई से ही यह रुकेगा। यह तल्ख टिप्पणी अदालत ने फल व सब्जियों में कीटनाशकों के प्रयोग पर निगरानी से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए की है।
आम को पकाने के लिए कैल्शियम कारबाइड का प्रयोग किसी को जहर देने के समान है तो ऐसे लोगों को भारतीय दंड संहिता की संबंधित धारा क्यों नहीं लगनी चाहिए। अगर ऐसे लोगों को दो दिन के लिए भी जेल भेजा जाता है तो उसका भी काफी असर होगा। इस जनहित याचिका की शुरुआत कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए की थी।
न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी व एजे भंबानी की खंडपीठ ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथोरिटी ऑफ इंडिया से पूछा कि क्या अब भी आम को पकाने के लिए अब भी कैल्शियम कारबाइड का इस्तेमाल हो रहा है? कोर्ट ने अथोरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को अगली तारीख पर मौजूद रहने का निर्देश दिया है।
याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कृषि मंत्रालय से भी पूछा है कि क्या कोई ऐसी किट है जिससे उपभोक्ता खुद घर पर फलों में कैल्शियम कारबाइड का पता लगा सके। मंत्रालय ने बताया कि ऐसी कोई किट उपलब्ध नहीं है और कैल्शियम कारबाइड की जांच केवल प्रयोगशाला में की जा सकती है।
दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता नौशाद अहमद खान ने कोर्ट को बताया कि संबंधित विभाग जांच के लिए बाजारों से फलों के सैंपल लेता है और उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए मुहिम भी चलाता है। कुछ सैंपलों की जांच में रसायन नहीं पाया गया है और बाकी सैंपलों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
कोर्ट खुद शुरू की गई जनहित याचिका के साथ ही दो अन्य लोगों की उन याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रहा है जिनमें खाद्य पदार्थों विशेषकर कृषि उत्पादों पर कीटनाशकों व रसायनों के प्रयोग पर नियंत्रण लगाने का निर्देश देने की मांग की गई है। कोर्ट की ओर से नियुक्त न्याय मित्र राजुल जैन ने कुछ समय पहले रिपोर्ट दाखिल कर कहा था कि फलों व सब्जियों में कीटनाशकों व रसायनों के अधिक प्रयोग के कारण कई देशों ने इनका आयात बंद कर दिया है और कई देश इस पर विचार कर रहे हैं।